Apr 12 2010
अमन-स्तवन
આજે પ્રસ્તુત છે, મારી કલમથી (આઈ મીન, કી-બોર્ડથી) પ્રથમવાર હિન્દીમાં લખાયેલી ગઝલ… જે જાન્યુઆરીમાં ‘ટાઇમ્સ ઑફ ઇન્ડિયા‘ દ્વારા યોજાયેલા ઓનલાઈન તરહી મુશાયરા વખતે લખાઈ હતી… જેમાં આપેલ પંક્તિ હતી: सरहद की दोनों ओर चहकता चमन रहे

(ચમનમાં સરહદ… નવેમ્બર 7, 2008)
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काश, हदकी
दोनो ओर प्यारका
कवन रहे…
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इक दूसरेंके वास्ते दिलमें स्तवन रहे,
सरहदकी दोनों और चहकता चमन रहे|
नफरत मिटानेमें ही सदा मन मगन रहे,
इक दूसरेके सुखकी हमेशा लगन रहे|
हर मांकी गोद राम-रहिमसे फली रहे,
हर गांव और गली गली नेकी चयन रहे|
हर दिलसे ये दुआ उठे की दूरियां हो कम,
दोंनो तरफको चैन मिले और अमन रहे|
हर हालमें वो खुश रहे, मन साफ हो सदा…
हर हालमें हमारा भी ऐसा ही मन रहे|
तो क्या हुआ अलग है जमीं और अलग धरम,
यु इक बने रहे सभी जैसे गगन रहे|
आओ, मिटा दे मनमें गडा मैल प्यारसे,
सबका भला हो ऐसी दिलोमे लगन रहे|
- ઊર્મિ
(જાન્યુ. ૧૩-૧૪, ૨૦૧૦)



